आदिवासी बनाम भोजपुरी-मगही को आपस में लड़ा कर उर्दू को फायदा दे दिया- सीपी सिंह

कांग्रेस और राजद को घाटा और झामुमो को फायदा- भाजपा
कांग्रेस और राजद को घाटा और झामुमो को फायदा- भाजपा

रांची: राज्य सरकार द्वारा उर्दू को सभी जिलों में क्षेत्रीय भाषा के रुप में मान्यता दिये जाने पर एक बार फिर झारखंड में भाषा विवाद और बढ़ गया है । विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के द्वारा मैट्रिक और इंटर स्तर की प्रतियोगिता परीक्षा में जिला स्तरीय पदों के लिए जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की जारी सूची में उर्दू को प्रत्येक जिला में मान्यता दिये जाने पर सवाल खड़ा किया है ।

हिंदी को बाहर किया और उर्दु की एंट्री 

पूर्व स्पीकर और रांची विधायक सीपी सिंह ने हिन्दी को मान्यता नहीं दिये जाने और उर्दू को सभी जिलों में मान्यता दिये जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है । सीपी सिंह ने इसे हेमंत सरकार पर तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया है । उन्होंने झारखंड में भाषा विवाद को शीघ्र खत्म कराने की मांग की है । सीपी सिंह ने इस भाषा विवाद को सरकार प्रायोजित बताते हुए कहा कि इससे झारखंड के स्थानीय छात्रों को हानि होगी ।

आलमगीर आलम और रामेश्वर उरांव ने किया स्वागत 

सरकार द्वारा शुक्रवार को लिये गये फैसले का मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव और आलमगीर आलम ने स्वागत किया है । आलमगीर आलम ने भाजपा द्वारा उठाये जा रहे सवाल पर पलटवार करते हुए कहा है कि साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने का काम भाजपा करती रही है । सरकार ने भाषा को लेकर उठे विवाद को शांत करने के लिए बोकारो और धनबाद में मगही और भोजपुरी की मान्यता समाप्त कर नये सिरे से अधिसूचना जारी की है ।

पूरे राज्य में उर्दू बोलने वाले लोग- जगरनाथ महतो

दूसरी ओर राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद दिया है । उन्होंने कहा कि गढ़वा में भोजपुरी भाषा को क्षेत्रीय भाषा की सूची में रखा गया है । इसी तरह मगही को चतरा, लातेहार जिला के क्षेत्रीय भाषा के सूची में रखा गया है । इस बार सभी 24 जिलों की क्षेत्रीय भाषा की सूची में उर्दू भाषा को भी शामिल किया गया है । उन्होंने कहा कि उर्दू बोलने वाले राज्य भर में लोग रहते हैं । इस भाषा को शामिल करने से हर्ज ही क्या है । उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है ।

भाषाई विवाद बढता देख हेमंत सरकार ने कार्मिक विभाग द्वारा पूर्व में जारी जिलावार भाषाओं के मान्यता में संशोधन करते हुए भोजपुरी और मगही को धनबाद और बोकारो से जहां हटा दिया है । वहीं, सभी जिलों में उर्दू भाषा की मान्यता बहाल की है । झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में इन भाषाओं को मान्यता दी गई है । कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के द्वारा शुक्रवार को क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची जिलावार जारी की गई है ।

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