गढ़वा में 16 कस्तूरबा वार्डेन के बाद अब 130 मनरेगा कर्मी नौकरी से बर्खास्त

10 साल से काम कर रहे थे मनरेगा कर्मी, एक झटके में गई नौकरी
10 साल से काम कर रहे थे मनरेगा कर्मी, एक झटके में गई नौकरी

गढ़वा जिले में नौकरी से हटाने का सिलसिला जारी है कुछ दिन पहले शिक्षा विभाग से जुड़े 16 कस्तूरबा के वार्डेन, लेखापाल को सेवा से बर्खास्त किया गया था अब इसी जिले में एक साथ मनरेगा के 130 कर्मियों को एक झटके में हटा दिया गया। मनरेगा आयुक्त के एक पत्र ने पिछले 10 वर्षों से कार्यरत मनरेगा कर्मियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कुल 130 कर्मियों के साथ यह वाक्या घटी है। मनरेगा आयुक्त के लेटर के बाद डीसी ने जिले के विभिन्न प्रखंडो में कार्यरत कर्मियों को हटा दिया है।

मनरेगा कार्य में दैनिक पारिश्रमिक (कंटिजेंसी) पर सेवा दे रहे 130 कर्मी हटा दिये गये हैं । जिनको हटाया गया है उनमें अधिकतर विभिन्न प्रखंडो में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, चालक, अनुसेवक, रात्रि प्रहरी, झाड़ुकश आदि शामिल हैं।  ये सभी कर्मी मनरेगा के सृजित पदों से अलग कंटिजेंसी मद से करीब 10-10 सालों से गढ़वा जिले के विभिन्न प्रखंडों में अपनी सेवा दे रहे थे। इसको लेकर उपविकास आयुक्त की ओर से जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को पत्र भेज गया ।

14 मार्च 2022 के माध्यम से निर्गत पत्र में कहा गया है कि मनरेगा आयुक्त ग्रामीण विकास विभाग की ओर से मनरेगा अंतर्गत सृजित पदों के अतिरिक्त अन्य पदों पर कार्यरत कर्मियों से काम नहीं लेने का आदेश प्राप्त है । इस वजह से गढ़वा जिले में वैसे कर्मी जो मनरेगा अंतर्गत सृजित पद के विरूद्ध कार्यरत नहीं हैं, उनका पारिश्रमिक या मानदेय का भुगतान मनरेगा प्रशासनिक मद से नहीं किया जायेगा । यदि इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है, तो इसे वितीय अनियमितता समझा जायेगा और इसकी पूर्ण जवाबदेही उनकी (बीडीओ) की होगी ।सभी बीडीओ को दो दिनों के अंदर कारवाई कर प्रतिवेदन सुनिश्चित करने को कहा गया है ।

इस पत्र के हिसाब से गढ़वा जिले में सृजित पदों के अलावे करीब 130 कर्मी बहाल हैं।  जिनमें सबसे ज्यादा कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल है़ं उल्लेखनीय है कि गढ़वा जिले में मनरेगा के लिये सिर्फ प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, रोजगार सेवक एवं कंप्यूटर सहायक के पद शामिल हैं । सृजित पदों के अलावे भी अलग से मनरेगा कार्य के लिये अलग-अलग प्रखंडों में अलग-अलग संख्या में कंप्यूटर ऑपरेटर रखे गये हैं। लेकिन इस पत्र के आलोक में कंप्यूटर ऑपरेटरों के अतिरिक्त पद का भुगतान मनरेगा से नहीं होगी ।  नौकरी से पत्र के अनुसार निकले कर्मियों ने बताया कि सरकार ये गलत कर रही है दस वर्ष काम कराकर निकालना अब गलत है हमलोग बेरोजगार हो जाएंगे। अब तो उम्र भी नही बचा की कोई तैयारी कर सके।

इस मामले में जिले के डीडीसी ने बताया कि सरकार के निर्देश के आलोक में हमलोग यह कार्य कर रहे है इन सभी को अतिरिक्त में रखा गया था अब पेमंट देने से मना कर रहे है इसलिए सब को निकाला गया है।

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