झारखंड हाईकोर्ट में हेमंत सोरेन का शपथपत्र, चुनाव आयोग के फैसले तक सुनवाई स्थगित करने की मांग

हाईकोर्ट के फैसले से चुनाव आयोग का फ़ैसला प्रभावित हो सकता है
हाईकोर्ट के फैसले से चुनाव आयोग का फ़ैसला प्रभावित हो सकता है

रांची। हेमंत सोरेन ने अपने नाम से पत्थर खनन आवंटन के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में जवाब दाखिल कर दिया है। सीएम हेमंत सोरेन की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने हाई कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि भाजपा की शिकायत पर इससे संबंधित मामला पहले से ही चुनाव आयोग में चल रहा है। चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया गया है। जिसमें जवाब दिए जाने की प्रक्रिया की जारी है। ऐसे में अगर हाई कोर्ट का कोई फैसला आता है, तो इससे चुनाव आयोग का निर्णय प्रभावित होगा। इसलिए चुनाव आयोग में मामले की सुनवाई तक हाई कोर्ट की सुनवाई को स्थगित कर दिया जाए।

शपथ पत्र में कहा गया है कि प्रार्थी का परिवार पहले से ही उनके (हेमंत सोरेन) परिवार से दुश्मनी रही है। इसलिए उनकी ओर से राजनीति से प्रेरित होकर इस मामले में जनहित याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थी लोकतांत्रिक तरीके चुनी गई हेमंत सरकार सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है। जनहित याचिका में वही आरोप लगाए गए हैं जिसको लेकर भाजपा ने राज्यपाल को शिकायत की गई है। भाजपा की शिकायत पर राज्यपाल ने चुनाव आयोग से मंतव्य मांगा है। आयोग ने उन्हें (हेमंत सोरेन) नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जिसमें उनकी ओर से जवाब दाखिल किया जा रहा है। फिलहाल अभी आयोग में उनका मामला लंबित है। इसलिए उक्त याचिका पर सुनवाई टाल दी जाए।

सीएम हेमंत सोरेन को लीज आवंटित करने और उनके करीबियों के शेल कंपनियों में निवेश मामले में झारखंड हाई कोर्ट में आज सुनवाई होगी। यह मामला चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इस मामले में राज्य सरकार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रार्थी की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर दिया गया है। सरकार ने मनरेगा घोटाले में सीबीआइ को प्रतिवादी बनाने से इन्कार किया है। लीज मामले में सरकार ने कहा है कि इस मामले में सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, सीएम हेमंत सोरेन ने अपने जवाब में कहा है कि चुनाव आयोग के फैसले तक सुनवाई स्थगित की जाए।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि अगर किसी पक्ष को उक्त तीनों मामलों में शपथ पत्र दाखिल करना है, तो वे 31 मई तक कर सकते हैं। क्योंकि अदालत एक जून को सुनवाई के दौरान किसी को भी जवाब देने के लिए समय प्रदान नहीं करेगी। एक जून को याचिका वैधता पर सुनवाई की जाएगी। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि झारखंड हाई कोर्ट को पहले याचिका वैधता पर सुनवाई करनी चाहिए। अगर याचिका सुनवाई योग्य है, तो फिर कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई कर सकता है।

24 मई को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में हाई कोर्ट को बताया था। इसके बाद अदालत ने याचिका की वैधता पर सुनवाई के लिए एक जून की तिथि निर्धारित की है। बता दें सीए लीज आवंटन और उनके करीबियों के शेल कंपनियों में निवेश को लेकर प्रार्थी शिव शंकर शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसके अलावा खूंटी में हुए मनरेगा घोटाले को लेकर अरुण कुमार दुबे की जनहित याचिका भी इन मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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