लाह उत्पादन से जुड़े राज्य के 73 हज़ार किसान, महिला कृषक हो रहीं सशक्त

लाह की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहन दे रही सरकार
लाह की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहन दे रही सरकार

रांची । वनोपज को बाजार और इससे जुड़े लोगों की समृद्धि के प्रति संजीदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रयास के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस सिलसिले को और कारगर बनाने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए लाह की खेती को राज्य सरकार बढ़ावा दे रही है।राज्य की ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर आमदनी बढ़ोतरी के प्रयासों को महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के ज़रिये अमली जामा पहनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के ये किसान लाह एवं लाह की खेती के ज़रिये बेहतर आजीविका की ओर अग्रसर हो रहे हैं| लाह की खेती से महिलाएं ना सिर्फ अपने गाँव में रहकर ही अच्छी आमदनी कर रहीं हैं, बल्कि राज्य में लाह उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रही हैं| ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के ज़रिये सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़कर अत्याधुनिक प्रशिक्षण के जरिए आमदनी बढ़ोतरी के प्रयास हो रहे हैं। इस पहल से राज्य की 73 हजार से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें ज्यादातर अति गरीब एवं वनों के आस-पास रहने वाले ग्रामीण परिवार हैं। इस साल करीब 2000 मीट्रिक टन छिला लाह का उत्पादन इनके द्वारा किया गया है।

लाह की वैज्ञानिक खेती से बढ़ रही आमदनी

पश्चिमी सिंहभूम के गोईलकेरा प्रखंड के रूमकूट गाँव की रंजीता देवी लाह की खेती से सालाना 3 लाख रुपए तक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। रंजीता देवी विगत कुछ सालों से आधुनिक तकनीक के ज़रिये वैज्ञानिक विधि से बिहन लाह की खेती कर रही हैं। सखी मंडल से जुड़ने के बाद उन्हें लाह की उन्नत खेती करने का प्रशिक्षण मिला। रंजीता देवी बताती हैं, दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण हमारी आजीविका मुख्यतः जंगल और वनोपज पर निर्भर करती है। हमारे परिवार में पहले भी लाह की खेती का कार्य किया जाता था, लेकिन सखी मंडल से जुड़ने के बाद हमे 25 दिनों की सीआरपी ड्राइव के द्वारा वैज्ञानिक विधि से लाह की खेती करना सिखाया गया। इस प्रकार सखी मंडल के माध्यम से लाह की आधुनिक खेती से सम्बंधित प्रशिक्षण के साथ 5 किलो बिहन लाह (बीज के रूप में) प्राप्त हुआ। लाह की खेती में रंजीता देवी कम खर्च में कई गुना ज्यादा उपज एवं मुनाफा कमा रही हैं। पिछले साल रंजीता ने 300 किलो बिहन लाह बीज के रूप में लगाया, जिससे उन्हें 15 क्विंटल लाह की उपज प्राप्त। उससे उन्हें 3 लाख रुपए की आमदनी हुई। उनका कहना है, सखी मंडल के माध्यम से हमे अपने पारंपरिक पेशे में ही स्थानीय आजीविका के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण एवं बाज़ार
महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के अंतर्गत महिला किसानों को लाह उत्पादन और बिक्री के लिए तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण से लेकर बिक्री हेतु बाज़ार भी उपलब्ध कराया जा रहा है| किसान उत्पादक समूहों के माध्यम से लाह की सामूहिक खेती एवं बिक्री की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को आवासीय प्रशिक्षण के जरिए लाह की उन्नत खेती के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ हीं पहले से लाह की खेती कर रहे किसानों के अनुभवों से भी उन्हें अवगत कराया जाता है, ताकि किसान आपस में जानकारी साझा कर सकें। लाह किसानों को उचित बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए एवं उनकी फसल की बिक्री हेतु, राज्य भर में 460 संग्रहण केंद्र और 25 ग्रामीण सेवा केंद्र का परिचालन किया जा रहा है। ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित इन संस्थाओं के माध्यम से लाह की खेती कर रहे किसान अपनी उपज को एक जगह इकठ्ठा करते हैं और फिर ग्रामीण सेवा केंद्र के माध्यम से एकत्रित उत्पाद की बिक्री की जाती है।

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना से लाह की खेती को मिला नया जीवन
लाह की आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी संपोषित सखी मंडल की बहनों को सीआरपी ड्राइव के माध्यम से 25 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाता है। ग्राम स्तर पर लाह कृषकों की मदद के लिए चुनिंदा क्षेत्रों में आजीविका वनोपज मित्र के रूप में दीदियों को प्रशिक्षित करके रखा गया है। आजीविका वनोपज मित्र ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती में मदद करते है। आश्रिता एवं रंजिता जैसी हजारों ग्रामीण महिलाएं आज लाह की वैज्ञानिक खेती से जुड़कर अच्छी आय कर रही हैं। वन संपदा से समृद्ध झारखण्ड में ग्रामीण परिवारों को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर जीवनशैली एवं आजीविका में उल्लेखनीय बदलाव आ रहा है।

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