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साधु समाज के स्वामी दिव्यज्ञान जी महाराज ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

कहा- साधु समाज से सीएम का नहीं मिलना, क्या दर्शाता है ?
……उज्ज्वल दुनिया संवाददाता……
रांची। प्रेस क्लब में साधु समाज के स्वामी दिव्यज्ञान जी महाराज  द्वारा मंगलवार को प्रेस वार्ता आहूत की गई। इसमें लव जिहाद और धर्मान्तरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कई बिन्दुओं पर सवाल उठाया। इनमें1.अफसोस होता है अपने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुरु माता गुरु बाबा, साफा होड़, पाहन,  पुजार, बैगा, संत, साधु किसी से नहीं मिले। अगर संविधान धर्मनिरपेक्ष है किसी भी धर्मावलंबियों  से नहीं मिलते कार्डिनल से मिलें  क्या प्रदर्शित करता है सरकार की मंशा?2. जब डायसिस सीएनआई मैं झगड़ा होता है तो सरकार किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करती और जैसे ही ड्यूडी  मंदिर में पाहन और पुरोहित मैं थोड़ा सा विवाद होता है मंदिर का सरकारी करण की ओर और ध्यान चला जाता है.. शुरुआती दौर में तो बड़े अच्छे तरीके से काम होगा आमदनी बढ़ने लगेगी वह सारा सरकारी करण उसका कर दिया जाएगा जैसे विभिन्न मंदिरों का किया गया है भारतवर्ष में यह हिंदुओं आदिवासियों के धार्मिक संस्थान के साथ ही क्यों??3. जब नियोगी कमीशन में वस्तुत वर्णित एक संख्या तभी चर्च खोला जा सकता है उसका का उपयोग क्यों नहीं पूरा आदिवासी क्षेत्र में जो चर्च बन रहा है उस मामले में।4. पूरे झारखंड में विद्यालय है अधिकतर पर ईसाइयों का कब्जा है वहां  विद्यार्थी जाते हैं या रहते हैं अधिकतर गैर ईसाई है सभी को मरियम और जीसस क्राइस्ट का चित्र या मूर्ति दिखाई जाती है… यह पूर्णता धर्मांतरण करने का एक माध्यम बनता जा रहा है…  चर्च को छोड़कर.. जीतने विद्यालय है मरियम और जीसस क्राइस्ट की मूर्ति के साथ वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का ध्यान रखते हुए जो बहुसंख्यक विद्यार्थी हैं उनके मुताबिक गणेश भगवान,  दुर्गा माता, मनसा माता, सरस्वती माता, वह सब देवी देवता सरना समाज के आराध्या का भी आज स्थान हो कि सभी लोग अपने अपने धर्म के प्रति आस्था प्रकट कर सके5. हम लोग आरक्षण के विरुद्ध बिल्कुल नहीं हैं। आरक्षण की सीमा बढ़ाई गई है। वह हो लेकिन 1950 में जिन्हें आरक्षण मिला था आरक्षण मिले बाकी लोगों को नहीं।6. जो धर्म वाले लोग कहते हैं कि हमारे यहां कोई जाति भेद नहीं है, जहाँ उच्च वर्ग और निम्न वर्ग है ही नहीं तो फिर वहाँ उस धर्म के लोगों आरक्षण क्यों मिले??  मान लीजिये की पास्कल तिवारी और जॉनसन  भुंइया समान है तो वहाँ आरक्षण किसको?निकिता परमार को न्याय मिले और लव जिहाद पर प्रकाश डाला। लव जिहाद के विरुद्ध कड़े क़ानून की माँग  राज्य सरकार से करी एक अन्य माँग मे उन्होंने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना लागू होने के बाद कितने लोगों का कितनी गति से धर्मांतरण हुआ है इसके अध्ययन के लिए भी सरकार एक कमेटी बनाएं।इस प्रेस-वार्ता में स्वामी दिव्यज्ञान जी महाराज, साधु-संत समाज, सच्जिदानंद मिश्रा ग्राम विकास प्रमुख आर.एस.एस, रवी मुण्डा आदिवासी समाज के नेता, विजय कुमार, वकिल, झारखंड हाईकोर्ट, अटल पाण्डेय, युवा नेता, सिंडिकेट सदस्य, रांची विश्वविद्यालय, कुसाग्र कुणाल, धर्म जागरण प्रमुख, रांची आदि मौजूद थे।

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