​वुहान लैब में चीन

 ​ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट ‘द क्लाक्सोन’ ने अपनी रिपोर्ट में किया सनसनीखेज खुलासा 

​पिछले माह सीपेक परियोजना का हिस्सा बनाकर हुई ​तीन साल की डील 

चीनी लैब के वैज्ञानिक पाकिस्तान के वैज्ञानिकों को दे रहे हैं ट्रेनिंग 

​​उज्ज्वल दुनिया  नई दिल्ली, 27 अगस्त (हि.स.)। ​​वुहान लैब से कोरोना वायरस लीक होने के मामले में भले ही चीन दुनिया भर को झुठला रहा हो लेकिन अब उसी लैब में ड्रैगन खतरनाक जैविक हथियार बनाने में लगा है। इसमें चीन का साथ दे रहा है उसका सदाबहार दोस्त पाकिस्तान। इस बात का खुलासा एक ​​ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट ‘द क्लाक्सोन‘ ने किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ​​चीन और पाकिस्तान ने ​​पिछले महीने चुपके से तीन साल की डील की है, जिसमें वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में जैविक हथियारों को विकसित करने का समझौता भी शामिल है। 
पाकिस्तान के 7 हजार नागरिकों का ब्लड सेंपल चीन भेजा गया 

रिपोर्ट में कहा गया है कि वुहान लैब के वैज्ञानिक कई वर्षों से पाकिस्तान में घातक ‘पशु-से-मानव’ रोगजनकों पर व्यापक शोध कार्य कर रहे हैं। अध्ययन में 7,000 से अधिक पाकिस्तानी किसान, चरवाहे और 2,800 से अधिक ऊंट और अन्य जानवर शामिल हैं। इन अध्ययनों में चीन ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद की है। रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि चीन और पाकिस्तान वुहान लैब के वैज्ञानिकों की टीम के साथ यह खतरनाक खेल अपने ‘चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर’ (​​सीपेक) के नाम पर खेल रहे हैं। दुनिया की नजर में चीन ने सीपेक का गठन तेल आयात के लिए किया और बाद में इसका दायरा बढ़ाकर एनर्जी और पॉवर प्रोजेक्ट जोड़े गए। अब पिछले महीने चुपके से तीन साल की डील करके खतरनाक जैविक हथियार बनाने का काम भी इसी परियोजना का हिस्सा बना दिया गया है। 

पाकिस्तानी फौज और चीन के बीच करार

रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च के लिए हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का ब्लड सैम्पल लिया गया। इसमें दूरदराज के रहने वाले उन्हीं लोगों को शामिल किया गया जो जानवरों के साथ काम करते थे।  द क्लाक्सोन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की वुहान लैब में पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को जैविक हथियारों के विकास, संचालन और प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि ये भविष्य में अपने देश में ही जैविक हथियार तैयार कर सकें। 

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