जंगलों की शान हिरण का खुब हो रहा शिकार

शिकारी गए भाग, जंगल मे मिला हिरण का छाल

टेस्ट के लिए देहरादून फॉरेंसिक लैब भेजा गया हिरण का चमड़ा

सिमरिया/गीतांजलि:- गरमी क्या शुरू हुई, समझ लीजिए जंगली जानवरों पर आफत आ गयी।दरअसल गरमी के दस्तक देते ही जंगली जानवर पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगे हैं।बेबस और लाचार जानवरों को ग्रामीण अब बड़ी आसानी से अपना शिकार बना ले रहे हैं।एक ऐसा ही मामला उत्तरी वनक्षेत्र अंतर्गत कुंदा प्रखंड के मरगडा पंचायत के जोबिया गांव से उजागर हुआ है।

वनक्षेत्र पदाधिकारी रामजी सिंह के अनुसार उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि जोबिया गांव के जंगल मे कुछ शिकारी हिरण को मार कर मांस तैयार कर रहे हैं।सूचना के तहत वनपाल तथा वनरक्षी वहां पहुँचे।उनके पहुंचने के पहले ही शिकारीयों की इसकी भनक मिल गई।भनक मिलते ही दुरूह क्षेत्र और जंगल की लाभ उठाकर शिकारी भागने में सफल रहे।भागने के क्रम में एक पेड़ के नीचे प्लास्टिक के बोरा गिरा मिला।बोरी को खोल कर देखा गया तो हिरण के छाल पाया गया। छाल को बरामद कर लिया गया है।छाल किस जानवर की है ,इसे पता लगाने के लिए चमड़ा फॉरेंसिक लैब देहरादून भेजा जाएगा।वही शिकारियों की पहचान की जा रही है।

वन विभाग के कर्मियों का कहना है कि पता चलते ही चिन्हित कर मामला दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज जाएगा।रिपोर्ट:-गीतांजलि।फोटो:-बरामद चमड़ा।

जानकर भी अनजान बनने की कोशिश करते हैं वन कर्मी

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वन कर्मी अपने अपने क्षेत्र के शिकारियों के कुंडली में बैठे हर ग्रह के बारे में भलीभांति से वाकिफ रहते हैं।इतना ही नहीं उन्हें यह भी पता है कि चमड़ा(खाल) किस जानवर का है।फिर देहरादून भेजकर जांच रिपोर्ट का इंतजार करना क्या यही इनकी ड्यूटी है।कोई भी मामले की तहकीकात में देर कर दूसरों को खुश करने से जंगली जानवरों का कभी भला नहीं होगा। पर्यावरण प्रेमी दिलीप सिंह का कहना है कि टाइम पास करने से बेहतर होता कि वे दोषी लोगों को चिन्हित करने में अपनी ऊर्जा खर्च करते।

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